राष्ट्रीय मुद्रा का किया अपमान,पंचायत समिति लक्ष्मणगढ़ कैशियर ने 10 के सिक्के लेने से किया इनकार
राष्ट्रीय मुद्रा का अपमान को लेकर, 124A के प्रावधान के अनुसार दंडनीय अपराध है:-एडवोकेट नरपत सिंह
लक्ष्मणगढ़ (अलवर, राजस्थान/ गिर्राज सौलंकी) लक्ष्मणगढ़ उपखंड मुख्यालय पर अधिकारियों और कर्मचारियों की इस तरह हठधर्मिता चल रही है
ऐसा ही मामला आज सामने आया है पंचायत समिति में जब एक आरटीआई कार्यकर्ता अपने आरटीआई में मांगी गई सूचना की प्रतिलिपि के संदर्भ में ₹96 पंचायत समिति लक्ष्मणगढ़ के नाम जमा कराने थे। जिस पर आरटीआई कार्यकर्ता ने ₹10 के सिक्के नो व एक सिक्का 5 का एक सिक्का एक रुपए का इस तरह ₹96 खुले देने पर पंचायत समिति लक्ष्मणगढ़ में कैशियर के पद पर आसीन कर्मचारी जितेंद्र जैमन ने 10 के सिक्के लेने से बिल्कुल मना कर दिया और साफ कहा कि मैं 10 के सिक्के नहीं लूंगा इस पर आरटीआई कार्यकर्ता को इधर उधर देखते हुए अपनी बेज्जती सी महसूस करने लगा। फिर कैशियर से बोले जी भाई साहब आपको कैश तो बैंक में ही जमा कराना है, ना जिस पर कैशियर ने कहां की बैंक नहीं लेते इन्हें और यह चलते भी नहीं। काफी परेशानी महसूस हुई फिर कहीं और दूसरे साथी से ₹100 उधार ले करके कैशियर जितेंद्र जैमन को देते हुए प्रतिलिपि शुल्क जमा कराते हुए रसीद प्राप्त की ऐसे में बात यह आती है की कैशियर कैसे अपने मनमर्जी चला सकता है ।जबकि कैशियर के द्वारा यह भारतीय मुद्रा का अपमान है जिसमें भारतीय मुद्रा के अपमान को लेकर 124,A के प्रावधान के अनुसार भारतीय मुद्रा का दंडनीय अपराध किया है। जिसमें दंडनीय अपराध के साथ 3 साल की सजा का प्रावधान भी है। अब देखना यह है की अगर मामला दर्ज भी होता है । तो क्या पुलिस प्रशासन इस तरह के अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई कर पाती है या नहीं। पर ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है माना कि बाजारों में दुकानदार को 10 के सिक्के नहीं लेते हैं पर कर्मचारी गण इस तरह की भारतीय मुद्रा का ही अपमान करने लगे तो क्या सही है।
गौरतलब है कि आए दिन अधिकारी व कर्मचारी आमजन आरटीआई कार्यकर्ता समाजसेवी लोगों व पत्रकारों पर इस तरह हावी होते चले जा रहे हैं कि नियम कायदों को ताक पर रखते हुए हर किसी व्यक्ति के ऊपर झूठे मनगढ़ंत मुकदमा दर्ज कर आते रहे हैं