इफ्को कम्पनी द्वारा जिले के प्रगतिशील किसानों को कम भूमि से अधिक फसल उत्पादन को लेकर प्रशिक्षण शिविर का किया आयोजन
रामगढ (अलवर, राजस्थान/ राधेश्याम गेरा) आज के युग में जन संख्या और वंश वृद्धि के कारण घटती जमीन से किसान किस तरह की तकनीकी और खाद का उपयोग कर अधिक उत्पादन लेने के लिए आज इफ्को कम्पनी द्वारा जिले के चुनिंदा प्रगतिशील किसानों का प्रशिक्षण शिविर अलवर के हनुमान सर्किल के समीप झंकार होटल में आयोजित किया गया। इसमें जिले भर से आये 100 से अधिक किसानों को इफ्को कम्पनी के जिला प्रबंधक डाक्टर गोपेश कुमार शर्मा, जयपुर से आए वरिष्ठ प्रबंधक डाक्टर एपी सिंह ने किसानों को कम भुमि में अधिक उत्पादन लेने के लिए रासायनिक उर्वरक डीएपी और यूरिया की जगह इफ्को कम्पनी द्वारा उत्पादित नैनों डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग कर उत्पादन बढ़ाने के लिए बारिकी से समाझाया।
साथ ही बताया कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का लाभ सीधे फसल के पौधे को मिलता है। जबकि उर्वरक खाद डीएपी उपयोग में केवल 20% ही आती है इसी तरह यूरिया भी और बताया कि 100 किलो यूरिया में 46 किलो नाइट्रोजन होता है शेष कैमिकल व्यर्थ के तत्व होते हैं एक 45 किलो के कट्टे में लगभग 21 किलो यूरिया होता है उपयोग में आधा भी नहीं आता जबकी जबकि एक ग्राम नैनो यूरिया में 15 करोड शुक्षम जीव होते हैं जो कि वायुमण्डल से सीधे पौधे के लिए सीधे शुद्ध नाइट्रोजन खींचते हैं।
साथ ही इफ्को कम्पनी की तरफ से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी सहित फसलों में दवा छिडकने के लिए स्प्रे मशीन और ड्रोन पर दी जाने वाली छूट के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बताया कि दो कार्टून नैनों यूरिया लेने पर 650 रुपए में स्प्रे मशीन दी जा रही है और 15 लाख का ड्रोन केवल एक लाख रुपए में दिया जा रहा है ड्रोन से कम पानी और कम समय में छिडकाव किया जा सकता है। इसी तरह नैनो डीएपी 500 मिली लीटर को यदि गोबर की कम्पोस्ट खाद के घोल में मिलाकर सात दिन रखा रहने के बाद उपयोग करेंगे तो 1500 मिली लीटर डीएपी के बराबर काम करेगी।
इसी तरह इफ्को की एनपीके कंसोरटीयम का उपयोग करने पर पति फसल को चार महिने तक के लम्बे समय तक हरा रखने की क्षमता होती है। और इसके इस्तेमाल से फसल के रोग को रोकने का काम किया जा सकता है। इधर कम्पनी के एस एफ ए बनवारी आबिद हुसैन ने किसानों को प्याज की फसल में लगने वाले रोग , रोग के लक्षण और रोग उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। एजीटी अभिषेक चौधरी द्वारा वर्तमान में बाई हुई फसल नरमा में लगने वाले रोग और उपचार सहित नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का कितनी मात्रा में कब कब उपयोग करना है इस बारे में बताया। इधर जिले के उद्यान विभाग से आए मनोज कुमार ने किसानों को फलदार वृक्ष नीबू,संतरा,बैर आदी पर सरकार द्वारा दी जाने वाली 75% छूट के बारे में बताया और साथ ही कहा कि वृक्षारोपण केवल ड्रिप पद्धति यानी बूंद बूंद से करने पर ड्रिप पद्धति पर भी 75% अलग से छूट मिलने के बारे में जानकारी दी।
इसी के साथ ही जिन किसानों ने नैनों यूरिया और नैनो डीएपी का अधिक मात्रा में इस्तेमाल किया है उनका सभी किसानों से परिचय कराते हुए डाक्टर एपी सिंह द्वारा सम्मानित किया गया। प्रशिक्षण शिविर के दौरान किसानों की समस्याओं का रुबरू होकर समाधान किया गया और नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग से उत्पादन में कितना फर्क दिखाई दिया इस बारे में तिजारा क्षेत्र के विशरोदा गांव के किसान धर्मपाल यादव,लक्ष्मणगढ क्षेत्र के हाजीपुर गांव के किसान विजय,अलावडा के राधेश्याम गेरा,टीकरी के मुकेश कुमार ने अपने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के अंत में कृषि अधिकारी जितेन्दर फौजदार और सहायक निदेशक मंगतुराम ने कृषि विभाग से सम्बधित किसानों को सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान सहित अन्य जानकारी दी गई। कम्पनी के एमसी सोनू, एस एफ ए सुरेन्द्र चौधरी, एफ ओ हनुमान गुप्ता और एक सौ से अधिक किसान मौजूद रहे ।